धूलि के रंग में वैमन्य्स्ता धूली|
पिचकारी ,रंग और गुलाल ,
मिटने को हैं हर रंज मलाल ||
काशी से शिव ,राम अवध से ,
मथुरा से कान्हा का आशीष |
मन को रंग लो भक्ति भाव से ,
जीवन से पलायित हो विष ||
गुरुचरणों में अर्पित कर गुलाल ,
वर्ष का आरम्भ करें हम आज |
खुशियाँ बने आपकी अगुआ ,
यह सन्देश लाया है फगुआ ||
-विनयतोष मिश्र



